Tuesday, 13 September 2011

PHOTO OF NITYANAND TUSHAR ,EDITOR ,YUG VANSHIKA

Nityanand Tushar

युग वंशिका -- प्रारंभ प्रकाशन ,गाज़ियाबाद द्वारा प्रकाशित ,हिंदी की नई साहित्यिक पत्रिका

युग वंशिका

प्रारंभ प्रकाशन ,गाज़ियाबाद द्वारा प्रकाशित ,हिंदी की नई साहित्यिक पत्रिका
संपादक -- नित्यानंद `तुषार`

(मर्मस्पर्शी कहानियाँ , सरस कविताएँ , गीत ,ग़ज़ल , लेख आदि )
कहानियाँ - -
जसवंत सिंह विरदी,जीवनसरकार ,रज्जन त्रिवेदी ,विपिन बिहारी ,रजनी गुप्त ,किसलय पंचोली ,सदानंद झा ,दिवा भट्ट ,और कुंवर आमोद
उपन्यासिका - - काजल पाण्डे ,
ग़ज़लें - - कैसर- उल- जाफ़री ,निदा फ़ाज़ली ,देवमणि पाण्डेय ,सरदार आसिफ और नित्यानंद `तुषार`
गीत  - -चन्द्र सेन विराट ,नचिकेता ,वीरेन्द्र आस्तिक ,और यशोधरा राठौर
कविताएँ - - रश्मि रमानी ,रंजना श्रीवास्तव
व्यंग्य - -प्रताप दीक्षित
लघु कथाएं - -कमल चोपड़ा ,पुष्प रघु ,जया  प्रियदर्शिनी शुक्ल ,अजित कुमार 
और ,हिन्दी ग़ज़ल की विनाश यात्रा - -हिन्दी ग़ज़ल समीक्षा की दुर्दशा ,सरकारी अकादमियों में हो रही जनता के पैसे की बर्बादी  पर सटीक उदाहरण सहित नित्यानंद `तुषार` का धारदार लेख  
मूल्य 30 रू
abhi delhi ,agra.ghaziabad,gwalior,bhopal ,bikaner mein uplabdh ,shighr hi desh ke aur bhagon mein bhi uplabdh hogi.jo sajjan  ise apne shahar mein apne tatha mitron ke liye mangana chahein ,ghazalmagic@gmail.com par sampark karein ,dhanyvaad - -yash
अपनी प्रति के लिए अपने शहर के पत्रिका विक्रेता से संपर्क करें , कोई कठिनाई होने पर
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yash - 9968046643                   

आजकल के रिश्तों में, ज़िन्दगी नहीं मिलती - -नित्यानंद `तुषार`

प्रारंभ प्रकाशन, गाज़ियाबाद द्वारा प्रकाशित
साहित्यिक पत्रिका `युग वंशिका` में प्रकाशित ग़ज़लों में से
कुछ पंक्तियाँ आपके लिये

दोस्त हर क़दम पर हैं ,दोस्ती नहीं मिलती
आजकल के रिश्तों में, ज़िन्दगी नहीं मिलती  - -नित्यानंद `तुषार`
*
तेरी आँखों ने कुछ देखा नहीं है
ज़माने में कोई अपना नहीं है - -नित्यानंद `तुषार`
*
घर पे हमारे नाम की तख्ती नहीं लगी
शोहरत की शक्ल ही हमें अच्छी नहीं लगी - -सरदार  आसिफ
*
उसको तबाह होना था आसार थे बहुत
उस सरफिरे कबीले के सरदार थे बहुत  - -सरदार आसिफ
*
क़दमके साथ ज़मीं सर पे आसमाँ क्यूँ है
जहाँ जहाँ जो रखा है वहाँ वहाँ क्यूँ है  - -निदा फ़ाज़ली
*
ख़ुदा  को ढूँढने वाले ख़ुदा के आस्तानों में
उसे बेचा ख़रीदा जा रहा है अब दुकानों में   - -निदा फ़ाज़ली

महकते ख़्वाब खयालों की रौशनी मिलती
हमें भी काश मुहब्बत की ज़िन्दगी मिलती  - - देवमणि पाण्डेय
*
जो मिलें प्यार में फिर न बिछडें कभी
मेरे दिल की यही इतनी फ़रियाद है - -देवमणि पाण्डेय
*
जाने हमको ये मुलाक़ात कहाँ ले जाए
बातों -बातों में कोई बात कहाँ ले जाए  - -कैसर -उल -जाफ़री
*
चांदनी के डूबते ही घर में क्या रह जायेगा 
तुम चले जाओगे दरवाज़ा खुला रह जायेगा -  -  कैसर -उल -जाफ़री

प्रस्तुति -  - यश

Hindi ki nayee Sahityik Patrika

Yug Vanshika

Sampadak- Nityanand Tushar

Prakashak-Prarambh Prakashan,Ghaziabad-

Abhee

,New Delhi, Gwalior, Agra, Ghaziabad, Bhopal, Bikaner mein uplabdh,

20 september se desh ke adhikansh bhagon mein uplabdh.

patrika milne mein koi kathinaai hone par ghazalmagic@gmail.com par sampark karein.

Saturday, 27 August 2011

प्रारंभ प्रकाशन ,गाजियाबाद द्वारा प्रकाशित



साहित्यिक पत्रिका



युग वंशिका



यहाँ उपलब्ध है



मध्य प्रदेश

तैलंग मैगजीन सेण्टर

रेलवे स्टेशन के निकट

भोपाल

पारीक न्यूज़ एजेंसी

सर्राफा बाज़ार

ग्वालियर



दिल्ली

सर्वोदय बुक स्टाल

प्लेटफोर्म नंबर २

नई दिल्ली



उत्तर प्रदेश

रोडवेज बुक स्टाल

गाजियाबाद



जोली मैगजीन सेंटर

चोपला ,

ग़ाज़ियाबाद



राजा बुक सेंटर

निकट रघुनाथ टाकिज

आगरा

अन्य शहरों में पत्रिका की उपलब्धता की सूचना भी आपको दी जाएगी

- - यश

Wednesday, 13 April 2011

युग वंशिका ,हिंदी की नई साहित्यिक पत्रिका - - संपादक -- नित्यानंद `तुषार`

युग वंशिका ,


हिंदी की नई साहित्यिक पत्रिका

 - - संपादक -- नित्यानंद `तुषार`

(मर्मस्पर्शी कहानियाँ , सरस कविताएँ , गीत ,ग़ज़ल , लेख आदि )

जुलाई 2011  के प्रथम सप्ताह में बाज़ार में उपलब्ध  होगी , अपनी प्रति के लिए अपने शहर के पत्रिका विक्रेता से संपर्क करें , कोई  कठिनाई होने पर  ghazalmagic@gmail.com          पर  मेल कर  संपर्क करें